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प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी निर्वाचित पार्षद को पद से हटाया गया।-दो तिहाई बहुमत के प्रस्ताव से आयोग की घोषित किया

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मुकेश पटेल प्रधान संपादक : प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी निर्वाचित पार्षद को पद से हटाया गया।-दो तिहाई बहुमत के प्रस्ताव से आयोग की घोषित किया

Mukesh Dhanvare

Thu, May 21, 2026

। क्रमांक 10 के पार्षद अर्जुन दरबार को पद से हटाया गया।
  दैनिक क्राइम दस्तक। भोपाल। खंडवा। हरसूद

कसी चुनाव में पार्षद को आयोग की घोषित करना एक बहुत बड़ी प्रक्रिया होती है।
मध्य प्रदेश की खंडवा जिले के हरसूद नगर परिषद।
  संभवत।की मध्य प्रदेश के किसी निर्वाचित पार्षद को। दो तिहाई बहुमत के प्रस्ताव से आयोग की घोषित किया गया हो।
नगर परिषद की आहूत बैठक में। मुख्य नगर पालिका अधिकारी नरपत सिंह।
अध्यक्ष मुकेश वर्मा। शाहिद 15 पार्षदों। नगर परिषद की बैठक में भाग लिया।
11 पार्षदों  अर्जुन दरबार को हटाने के सहमति के लिए प्रस्ताव में साइन किया।

हालांकि मध्य प्रदेश में इसके पूर्व भिंड के।
नगरी निकाय के पार्षद को पद से पृथक किया गया था। उन्होंने खर्च का  हिसाब। नहीं दिया था।
इंदौर के पार्षद अनवर कादरी को भी पद से हटाया गया। किंतु हरसूद नगर परिषद में। मध्य प्रदेश के इतिहास में संभवत पहली बार है कि किसी पार्षद को चुने हुए पार्षद  अपने पद से पृथक कर  आयोग की घोषित कर दिया।ngfmमध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 (नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत) के तहत पार्षद को हटाने/अयोग्य करने की मुख्य प्रक्रिया धारा 41 के अंतर्गत है।धारा 41 के तहत हटाने के आधार:

  • कलेक्टर किसी भी समय पार्षद को हटा सकता है यदि:

    • उसका पार्षद बने रहना जनहित या परिषद के हित में वांछनीय नहीं है।

परिषद द्वारा कम से कम 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पारित करके दुराचार (misconduct) या अनुचित आचरण के आधार पर हटाने की सिफारिश की गई हो।

  • धारा 41(3): कलेक्टर पार्षद को अगले कार्यकाल के लिए भी अयोग्य घोषित कर सकता है।

  • अपील: कलेक्टर के आदेश के विरुद्ध 30 दिनों के अंदर राज्य सरकार में अपील की जा सकती है।

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