मुकेश पटेल प्रधान संपादक : मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता और मंत्री कुंवर विजय शाह आज कठिन समय से गुजर रहे हैं, लेकिन क्या सिर्फ आज से किसी नेता का मूल्
Mukesh Dhanvare
Sun, Feb 8, 2026
जब वक्त मुश्किल हो… तब याद आता है असली काम
विजय शाह सिर्फ नाम नहीं, एक दौर है।
आज जब राजनीति में शोर ज़्यादा है और काम कम याद किया जाता है, तब ज़रूरी है कि हम इतिहास, योगदान और ज़मीनी सच्चाई को भी देखें।
मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता और मंत्री कुंवर विजय शाह आज कठिन समय से गुजर रहे हैं, लेकिन क्या सिर्फ आज से किसी नेता का मूल्यांकन हो सकता है? मेरा जवाब है कि नहीं।
विजय शाह उन नेताओं में हैं जिन्होंने सत्ता नहीं, सेवा को राजनीति की पहचान बनाया। हरसूद जैसे आदिवासी क्षेत्र से लगातार आठ बार विधायक बनना कोई संयोग नहीं है। यह जनता का भरोसा है, जो दशकों तक कायम रहा। खुद आदिवासी समाज से आने वाले विजय शाह ने हमेशा इस वर्ग की पीड़ा को नज़दीक से समझा। छात्रावास, शिक्षा, छात्रवृत्ति, सड़क, पानी, वन अधिकार । ये उनके लिए सिर्फ योजनाएँ नहीं, बल्कि जीवन के सवाल रहे।
वन, स्कूल शिक्षा, आदिवासी कल्याण जैसे विभाग संभालते हुए भी वे कभी “एसी कमरे के नेता” नहीं बने। गांव, टोले, ढाणी और आम कार्यकर्ता तक उनकी सीधी पहुँच रही। उनके कार्यकर्ता उन्हें नेता नहीं बल्कि अपना आदमी मानते है। उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है, कार्यकर्ताओं के लिए हरदम उपलब्धता।
समस्या हो तो फोन उठता था,
दर्द हो तो सामने खड़ा नेता मिलता था।
इसीलिए आज भी लोग कहते हैं “वो हमारे नेता हैं।”
आज वे न्यायिक प्रक्रिया के दौर से गुजर रहे हैं। संविधान और न्यायालय पर सबको भरोसा है। लेकिन यह भी सच है कि किसी के 30+ साल के काम को एक घटना से मिटाया नहीं जा सकता। इतिहास गवाही देता है। राजनीति में समय कठिन आता है,
पर जो नेता जनता के लिए खड़ा रहता है ।
वो वक्त से बड़ा हो जाता है।
विजय शाह का नाम सिर्फ खबरों में नहीं,
लाखों लोगों की स्मृतियों और अनुभवों में दर्ज है।
मेरा आज भी उन्हें समर्थन इसलिए है
क्योंकि काम बोला है,
सेवा बोली है,
और जनता ने देखा है।
नेता वही, जो मुश्किल में भी याद रखा जाए।
विजय शाह — एक नाम, एक पहचान, एक युग।
जब वक्त मुश्किल हो… तब याद आता है असली काम
विजय शाह सिर्फ नाम नहीं, एक दौर है। आज जब राजनीति में शोर ज़्यादा है और काम कम याद किया जाता है, तब ज़रूरी है कि हम इतिहास, योगदान और ज़मीनी सच्चाई को भी देखें। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता और मंत्री कुंवर विजय शाह आज कठिन समय से गुजर रहे हैं, लेकिन क्या सिर्फ आज से किसी नेता का मूल्यांकन हो सकता है? मेरा जवाब है कि नहीं। विजय शाह उन नेताओं में हैं जिन्होंने सत्ता नहीं, सेवा को राजनीति की पहचान बनाया। हरसूद जैसे आदिवासी क्षेत्र से लगातार आठ बार विधायक बनना कोई संयोग नहीं है। यह जनता का भरोसा है, जो दशकों तक कायम रहा। खुद आदिवासी समाज से आने वाले विजय शाह ने हमेशा इस वर्ग की पीड़ा को नज़दीक से समझा। छात्रावास, शिक्षा, छात्रवृत्ति, सड़क, पानी, वन अधिकार । ये उनके लिए सिर्फ योजनाएँ नहीं, बल्कि जीवन के सवाल रहे। वन, स्कूल शिक्षा, आदिवासी कल्याण जैसे विभाग संभालते हुए भी वे कभी “एसी कमरे के नेता” नहीं बने। गांव, टोले, ढाणी और आम कार्यकर्ता तक उनकी सीधी पहुँच रही। उनके कार्यकर्ता उन्हें नेता नहीं बल्कि अपना आदमी मानते है। उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है, कार्यकर्ताओं के लिए हरदम उपलब्धता। समस्या हो तो फोन उठता था, दर्द हो तो सामने खड़ा नेता मिलता था। इसीलिए आज भी लोग कहते हैं “वो हमारे नेता हैं।” आज वे न्यायिक प्रक्रिया के दौर से गुजर रहे हैं। संविधान और न्यायालय पर सबको भरोसा है। लेकिन यह भी सच है कि किसी के 30+ साल के काम को एक घटना से मिटाया नहीं जा सकता। इतिहास गवाही देता है। राजनीति में समय कठिन आता है, पर जो नेता जनता के लिए खड़ा रहता है । वो वक्त से बड़ा हो जाता है। विजय शाह का नाम सिर्फ खबरों में नहीं, लाखों लोगों की स्मृतियों और अनुभवों में दर्ज है। मेरा आज भी उन्हें समर्थन इसलिए है क्योंकि काम बोला है, सेवा बोली है, और जनता ने देखा है। नेता वही, जो मुश्किल में भी याद रखा जाए। विजय शाह — एक नाम, एक पहचान, एक युग।
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